सही अध्यात्म क्या है?       ऑनलाइन ऑडियो सुनें

बेटे ! सही अध्यात्म कैसा होता है? सही अध्यात्म के लिए क्या करना चाहिए? सही भजन कैसे किया जा सकता है? कौन सा तरीका ऐसा है जिससे भगवान की कृपा मनुष्य पर बरस सकती है और भगवान के समीप आ करके आदमी फायदा उठा सकता है। मित्रो! मैंने यही प्रयोग अपने आप में अपने लिए किया और अपने लिए प्रयोग करने के पश्चात् लोगों को ये बताया, हमने ये प्रयोग किए हैं और आपको इस रास्ते पर चलना चाहिए। जब कभी भी आपको आस्तिकता और आध्यात्मिकता अपनाने के लिए जरूरत हो, तो आप इसी रास्ते पर चलें। इसी रास्ते पर चलेंगे तो मैं आपको यकीन दिलाता हूँ कि आपको ये शिकायत नहीं करनी पड़ेगी कि आस्तिकता गलत है, भगवान् गलत है, उपासना से लाभ नहीं होता।

नये युग की आस्तिकता की शुरुआत अगर होगी तो कहाँ से होगी? तो वो चाइना से होगी और रसिया से होगी। नहीं साहब, वो तो कम्युनिस्ट हैं। हाँ बेटे ! मैं कम्युनिस्टों को आप से ज्यादा ईमानदार मानता हूँ। आप बेईमान हैं। और वो, ईमानदार आदमी। क्यों? क्योंकि उनकी अकल ने ये कहा है कि ईश्वर नहीं है तो, उनने खुले आम कहा है; नहीं, कोई ईश्वर नहीं है। हमने कहा, सारी दुनिया ईश्वर को मानती है। सारी दुनिया मानती रह सकती है, हम नहीं मानते। ईमानदार आदमी। अगर आप उसको ये जिस दिन बता देंगे, साबित कर देंगे कि ईश्वर का वजूद है, है; तो मेरा अपना ऐसा विश्वास है कि वैज्ञानिक और बुद्धिजीवी होने के नाते, ईमानदार आदमी होने के नाते, सबसे पहले वो आस्तिकता को स्वीकार कर लेगा।

बेटा ! हमको एक काम के लिए भेजा गया, कि हम आस्तिकता को जिंदा रखें और आस्तिकता को जीवित बनाए रखने के लिए हम काम करें। आस्तिकता के रास्ते पर चलने से, भगवान का रास्ता चलने से आपको लाभ होगा, फायदा होगा। भौतिक लाभ भी होगा और लौकिक लाभ भी होगा, आंतरिक लाभ भी होगा, सामाजिक लाभ भी होगा, सम्मान भी मिलेगा। ऐसे बहुत सारे आश्वासन दिये थे, जैसा कि मैं कल कह रहा था आपसे गायत्री मंत्र की महिमा के सम्बन्ध में। न केवल गायत्री मंत्र की महिमा के सम्बन्ध में बल्कि प्रत्येक उपासना के सम्बन्ध में। हमने एक काम किया कि हमने लोगों को एक नमूना पेश किया, एक किताब पेश की। कौन सी किताब और नमूना है? बेटे ! हमने 55 पन्नों की किताब लिखी है और उसका प्रत्येक पन्ना लोहे की कलम से और सोने के पत्रों पर लिखा हुआ है। उस 55 पन्ने की किताब का नाम क्या है? बेटे ! हमारी जिन्दगी है। हमने पूरी जिन्दगी में एक ही बात लोगों के सामने की है पेश-आस्तिकता कैसे हो सकती है? उपासना कैसे की जानी चाहिए? और उपासना का स्वरूप क्या हो सकता है? उपासना का स्वरूप अगर आप सही रूप से करें, अगर आप उसके प्रोसीजर पर ठीक तरह से चलते हैं तो हम आपको प्रत्यक्ष उदाहरण देते हैं, परोक्ष नहीं। आस्तिकता को अपनाने वाला भौतिक दृष्टि से, आत्मिक दृष्टि से, सम्मान की दृष्टि से, श्रेय की दृष्टि से उतना ज्यादा नफा उठा सकता है जितना कि और किसी तिजारत में नहीं हो सकता। और कोई तिजारत नहीं है ऐसी। कितना? जितना कि आध्यात्मिकता के क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद मनुष्य जितना लाभ उठा सकता है। मैं ये कहता हूँ— इतना ज्यादा लाभदायक धन्धा कोई भी नहीं है। नहीं, महाराज जी! डकैती और चोरी का। नहीं बेटे ! डकैती और चोरी का भी धन्धा इतना लाभदायक नहीं है। ये धन्धा इतना सेफ है, आप जंगल में रहिए, हिमालय पे चले जाइए, कहीं भी रहिए; कोई आपको छेड़ने वाला नहीं है, कोई चाकू दिखाने वाला नहीं है, कोई इनकम टैक्स वाला आपके पास आने वाला नहीं है, कोई चक्कर नहीं है, सब आपकी सहायता करने वाले हैं। मैं ये कहता हूँ आध्यात्मिकता का धन्धा बहुत पेईंग और बहुत फायदेमंद है। नहीं साहब! हमको आपकी बात पर विश्वास नहीं है। बेटे! विश्वास नहीं है, तो हम तेरे सामने गवाही के रूप में पेश होते हैं। गवाही के रूप में पेश होते हैं कि ये सब धन्धा फायदेमंद है। हमने कोई धन्धा नहीं किया है, हमने न आज तक व्यापार किया, न हमने खेती-बाड़ी की, न हमने किसी की नौकरी की। कुछ काम नहीं किया है, एक ही धन्धा किया है—उस तिजारत का नाम है भगवान की शरण पकड़ना।

भगवान की शरण किस तरीके से पकड़ी जा सकती है, यही हमारे जीवन का सारे-का-सारा सार है। हमने दो मोर्चों पर लड़ाई लड़ी है। प्रच्छन्न नास्तिकों को, धर्म का कलेवर ओढ़कर चलने वालों को, धर्म के प्रति बाहर से जीभ से बात कहने वालों को और भीतर-ही-भीतर खोखले और कमजोर लोगों को हमने ये कहा है कि आस्तिकता अगर आप सही ढंग से करें, तो आपको समय न मिलने की फुर्सत का बहाना नहीं बनाना पड़ेगा। और आपको मन न लगने की शिकायत न करनी पड़ेगी क्योंकि आप उसके फायदे को जान जाएँगे। जब हम फायदे को नहीं जानते तो मन नहीं लगता। सीधी-सी बात है। हमने ये कहा लोगों से—ये फायदे का काम है।

॥ॐ शान्तिः॥